सोमवार, 15 सितंबर 2014
दीपक अरोड़ा की स्मृति में 'एक कविता का असमय अंत' कार्यक्रम
जयपुर: प्रतिष्ठित आलोचक प्रो. मोहन श्रोत्रिय ने कहा है कि दीपक अरोड़ा कविताओं में प्रेम का महाख्यान रचने वाले कवि थे जिनके मन में उदासी और घुटन थी। उनकी कविताओं में प्रेम के साथ समय के प्रश्न भी आते हैं। उनकी कविताओं का जब भी मूल्यांकन होगा तब उनकी क्षमताओं का पता चलेगा।
प्रो. श्रोत्रिय हिन्दी दिवस पर कवि दीपक अरोड़ा की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम ‘एक कविता का असमय अंत’ में मुख्य अतिथि के रूप में व्याख्यान दे रहे थे। इस मौके पर दीपक अरोड़ा के कविता संग्रह ‘समुन्द्र इन दिनों’ का लोकार्पण भी किया गया।
प्रो. श्रोत्रिय ने कहा कि देश भर में प्रेम कविताएं लिखी जा रही हैं । इस दृष्टि सेराजस्थान के प्रेमचंद गांधी का आज अपना एक खास नाम है लेकिन दीपक की कविताएं अपनी तरह की हैं और उनमें घनी उदासी है।उन्होंने कहा कि लोग फ़ेसबुक कविताओं को अच्छी नज़र से नहीं देखते तथा फेसबुकिया कहते हैं लेकिन दीपक ने फेसबुक से अपनी पहचान बनाई। मेरा मानना है कि फेसबुक पर भी अच्छी कविताएं आ रही है ।
उन्होंने कहा कि दीपक प्रतिभावान और भविष्य की संभावनाओं वाले कवि थे जिन्होंने अपनी 43 साल की अल्प अवधि में अच्छी रचनाएँ दी। उन्होंने आशा दर्शाई कि बोधि प्रकाशन आने समय में दीपक अरोड़ा की शेष रचनाओं को भी सामने लाया जाएगा। प्रमुख साहित्यकार-कथाकार डा. लक्ष्मी शर्मा ने दीपक अरोड़ा की कविताओं पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि उनकी कविताओं में घनेरे शब्द बिन्दु,अद्भुत शब्द चित्र और बिम्ब सामने आते हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति की उदास छवियाँ हैं।उनकी कविताओं में अटूट प्रेम है जो विश्वास दिलाता है कि ज़िंदगी जैसी भी है वह प्यार करने लायक है । आज यहाँ हम दीपक को विदा करने नहीं अपितु संवाद करने आए हैं।
दीपक अरोड़ा के पिता जसराज भटेजा ने अपने कवि पुत्र की स्मृतियो को साझा करते हुए कहा कि वह सब कुछ छोड़ कर सिर्फ लेखन करना चाहता था लेकिन उसकी मंशा को हम भाँप नहीं सके, इसका रंज हमेशा रहेगा। जिंदगी का सफर इतना छोटा होगा ऐसी कभी कल्पना भी नहीं थी।
सुश्री मीनू सूद, सुश्री निवेदिता शर्मा, इरा टाक और अजय अनुरागी ने दीपक अरोड़ा की कविताओं का पाठ किया।
अतिथि कवियों सर्वश्री लोकेशकुमार सिंह ने कविता का होता नहीं सुनो कभी भी अंत, दीपक भले ही बुझ गया कविता हुई अनंत और विनोद पदरज ने ‘आंसुओं की लिपि’ शीर्षक कविता और एक अन्य कविता ‘हवा चलती है तो पत्ते हिलते हैं, पत्ते हिलते हैं तो हवा चलती है एवं अश्विनी शर्मा ने बहुत मधुर बातों की बात चलेगी कविताओं के माध्यम से दीपक अरोड़ा को स्वरांजली दी।प्रारम्भ में बोधि प्रकाशन के संदीप मायामृग ने अतिथियों को पुस्तकों के सैट भेट कर उनका स्वागत किया और बनवारी कुमावत ‘राज’ ने सभी का आभार व्यक्त किया। रिपोर्ट: फारूक आफरीदी 


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